Solar Storm: पृथ्वी पर एक बार फिर सोलर स्टॉर्म आने वाले हैं. अंतरिक्ष के मौसम के बारे में रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि 2020 में ही सोलर साइकिल शुरू हो चुका है. सोलर स्टॉर्म की वजह से एरोप्लेन, पावर ग्रिड, कम्युनिकेशन चैनलों तक पर बुरा असर पड़ता है. कुछ मामलों में तो इंसानों की मृत्यु तक हो जाती है.
हाल ही में पृथ्वी पर सोलर स्टॉर्म देखने को मिले हैं. सोलर स्टॉर्म एक तरह का इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एनर्जी होती है जो सूरज की सतह से निकलता है. अब वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में पृथ्वी पर ऐसे ही कई सोलर स्टॉर्म देखने को मिलेंगे. फिलहाल तो अधिकतर लोग इससे बेख़बर होते हैं, लेकिन उनके जीवन पर भी इसका असर पड़ता है. इस जबरदस्त अदृश्य एनर्जी में इतनी ताकत होती है कि इससे इंसानी गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं. पृथ्वी पर इन सोलर स्टॉर्म की वजह से पावर ग्रिड और कम्युनिकेशन चैनलों पर भी असर पड़ने वाला है. यहां तक कि पृथ्वी पर जीवन के लिए भी इसे खतरनाक माना जाता है.
सोलर स्टॉर्म के दौरान सूरज की सतह से ‘एनर्जी का गुब्बार’ फूटता है, जिससे पृथ्वी पर इलेक्ट्रिकल चार्ज और मैग्नेटिक फील्ड की खेप आती रहती है. वैज्ञानिकों का कहना है सूरज पर लंबे समय तक ऐसी स्थिति नहीं देखने के मिली थी. लेकिन अब यह एक बार फिर शुरू हो चुका है. सूरज की सतह पर ऐसी ही कई तरह की गतिविधियां शुरू हो चुकी है. मौसम वैज्ञानिक मैथ्यू कैपुची ने पिछले साल दिसंबर में द वॉशिंगटन पोस्ट में इसपर एक लेख भी लिखा है.
2020 में ही शुरू हो चुका है सोलर साइकिल
कैपुची का कहना है कि 2020 में ‘सोलर 25’ नामक एक नई सोलर साइकिल शुरू हुआ है. उनका मानना है कि यह आगामी 11 साल तक चलने वाला है. 2025 के दौरान सूरज पर सबसे ज्यादा गतिविधियां देखने को मिलेंगी. सूरज की सतह पर समय-समय पर बदलने वाली मैग्नेटिक गतिविधियों को ही सोलर साइकिल कहते हैं. इसमें से हर एक सोलर साइकिल 9 से 14 सालों तक के लिए होता है.
क्या सोलर स्टॉर्म से इंसानों पर असर पड़ेगा?
जानकारों का कहना है कि सोलर स्टॉर्म की वजह से इंसानों पर भी असर पडे़गा. इस तरह के सोलर स्टॉर्म से इंसानों के नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है, जिसकी वजह से कई अंग काम करना बंद कर देते हैं और अंतत: इंसान की मृत्यु हो जाती है.
सोलर स्टॉर्म और कार्डियोवस्कुलर बीमारियों के बीच संबंध पर एक स्टडी करने वाले वैज्ञानिक का मानना है कि सोलर स्टॉर्म से कई तरह के नुकसानदेह रेडिएशन निकलते हैं. इससे कई अंग काम करना बंद कर देते हैं और कुछ मामलों में इंसानों की मृत्यु भी हो जाती है.
हवाई जहाज पर पड़ता है असर
सोलर स्टॉर्म से निकलने वाली रेडिएशन से स्किन की कई बीमारियां होती हैं. कुछ मामलों में तो यह कैंसर का कारक है. उनका कहना है कि इस तरह के रेडिएशन एक्सपोजर के दौरान प्लेन चलाते समय पायलटों को भी मोतियाबिंद का खतरा होता है. कई बार तो फ्लाइट के रूट भी बदलने पड़ जाते हैं. क्रू मेंबर्स के साथ-साथ यात्रियों को भी खतरा बना रहता है.
कम्युनिकेशन से लेकर पावर ग्रिड तक पर असर
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह के सोलर स्टॉर्म की वजह से सैटेलाइटों पर भी असर पड़ता है और इस प्रकार कम्युनिकेशन चैनल पर भी प्रभावित होते हैं. इस बात की भी संभावना है कि पावर ग्रिड में खराबी की वजह से पूरे शहर में ब्लैकआउट की स्थिति देखने को मिल सकती है.
दरअसल, सोलर स्टॉर्म भी पावर ग्रिड में बिजली प्रवाह पर असर डालते हैं. इसे ट्रांसफॉमरों के फटने का भी खतरा बना रहता है. ऑयल और गैस पाइपलाइन पर असर पड़ता है.
सोलर स्टॉर्म को लेकर वैज्ञानिकों की खोज भी सीमित है. जब तक सोलर स्टॉर्म के संभावी असर के बारे में उन्हें पता चलता है, तब तक यह पृथ्वी से मात्र एक से डेढ़ घंटे की दूरी पर होता है. पहले इस तरह के बात को लेकर कोई गंभीरता नहीं देखने को मिलती थी. लेकिन, हाल के सालों में कई सरकारें स्पेस मौसम के बारे में ज्यादा गंभीर हुई हैं. अमेरिका और ब्रिटेन भी इस दिशा में काम कर रहे हैं.
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